Wednesday, November 2, 2011

WHY EVERYBODY HATES MUSLIM???

 

Islam is exhorted by their GOD to kill, mutilate, molest, rape and steal. This repetitive conditioning of the mind is performed by indoctrinating the Koranic Surahs in every Muslim child at Islamic schools. The Muslim child daily memorizes the Koranic Surahs which exhort him/her to murder, violence, hatred and crime against every Non-Muslim.



The Muslim child learns to hate Non-Muslims, before he loses his first tooth. The doctrines that are forced down his throat are so deeply embedded in the child's mind, that he cannot view the world in any other perspective except as a composition of Muslims and Kafirs (Infidel). It is also made clear to the child that ALL Kafirs (Non-Muslims) are evil by their very nature and that it is every Muslim's moral and religious duty to either convert all the Kafirs to Islam by force or Kill each and every one of them.




 


Allah,the God of the Muslims is clearly stating the exact method that he adopts when he commits genocide of an entire POPULATION.why does Allah decide to destroy entire populations? Simply because they don't believe in Allah and so Allah will kill them all, to take revenge. Next Allah is indulging in an unbelievable display of conceit. He is actually BOASTING about how many generations he has destroyed after Noah. If Allah had a list of his merits, no doubt genocide of numerous generations of people would top his list. Allah enjoys watching the annhilation of thousands of Non-Muslims at the hands of his pious followers,the Muslim.

 

Koran 21:11 How many were the populations we utterly destroyed because of their inequities, setting up in their place other peoples
Again Allah is boasting about his amazing exploits such as genocide and displacement of innocent people. The justification for this crime is that these innocent people had "inequities". Apparently any community which is not Muslim is full of inequities by Islamic definition and therefore fair game for all pious Muslims to massacre and plunder.


 

They were, upon the whole, from the black day when they first entered Europe, the one great anti-human specimen of humanity. Wherever they went a broad line of blood marked the track behind them, and, as far as their dominion reached, civilization disappeared from view. They represented everywhere government by force as opposed to government by law. Yet a government by force can not be maintained without the aid of an intellectual element. 



The Council on American Islamic Relations (CAIR) has published an ad in several California newspapers to promote peace between Christians and Muslims. "Like Christians," it says, Muslims respect and revere Jesus. Uh-huh yeah, right! Islam teaches that Jesus is one of the greatest of God's prophets and messengers to humankind. Like Christians, every day, over 1.3 billion Muslims strive to live by his teachings of love, peace, and forgiveness. Those teachings, which have become universal values, remind us that all of us, Christians, Muslims, Jews, and all others have more in common than we think.

 

In fact, some of these forced conversions, are being conducted by well funded groups.. It is common for money to be offered to Christians to convert to Islam, but it also common for intimidation and force, including kidnapping and the threat or use of rape to be adopted as a method of making Christians convert to Islam. Christian women and girls are especially vulnerable to these attacks and the Egyptian authorities do nothing to protect the Christians. The Egyptian police even order the families of kidnapped Christian women to forget about their daughters and not to try to get them back.

 

The world "ISLAM" is Arabic for "surrender" or "submission" to the will of Allah (God). In the language of the Holy Qur'an, Islam means the readiness of a person to take orders from God and to follow them through. It is not derived from the word, "peace," as Muslims would have us believe! Look it up in any dictionary and see for yourself! Seeing a Muslim praying nearly flat on his face five times a day even projects the appearance of a master-slave relationship... a submission of sorts. And while the Muslim is submissive to Allah, all "non-believers" (Christians, Jews, Buddhists, Catholics, etc.) MUST submit to the Muslim. That's how THEIR God wills it to be!

 

it is legally considered a battlefield (Dar-ul-Harb). Once it has converted to Islam (or all its citizens have been slaughtered or driven out), it then becomes a Land of Peace (Dar-us-Salaam). For those who think that the threat of Islam is only a phenomenon of the Middle East, think again!
Islam may become the greatest murdering force in the history of mankind. The Muslims have a saying: "First [destroy] the Saturday People (Jews)... then the Sunday People (Christians)."
     

Thursday, June 9, 2011

एक अहसानफरामोश कौम !!!!!




  • एक कौम जो मिटटी का कर्ज चुकाना न जानती हो!
  • एक कौम जो अपने ऊपर हुए उपकार का बदला उस पर उपकार करने वाले के घर को बर्बाद करके देती हो!
  • एक कौम जो अपने ही निशां स्वं मिटाने में लगी हो!
  • वो कोम जो देश के मालिको से देश को छिनने में लगी हो!
  • एक कौम जो अहसानफरामोश हो उसका क्या?
 मेरे लिए मक्का और काबा उतने ही पवित्र है जितना की यरूशलम और वेटिकेन सिटी. मेरे लिए हर देश का स्वाभिमान और उसके नागरिक उतने ही पवित्र है जितना मैं खुद और मेरा अपना देश. परन्तु उस कौम का क्या जो मेरी ही थाली में खा खा कर उसमे छेंक करती हो!
क्या उस कौम का मैं आदर करू.!
ध्रुव सत्य है, की १९४७ का बटवारा इस बात पर ही हुआ था की हमे एक ऐसे काफ़िर के साथ नहीं रहेना जो हम से अलग है. जबकि सत्य यह है के आप उस घर में आक्रमणकारी बनकर, शरणार्थी बनकर आये थे आश्रय पाया या जबरदस्ती राज किया और फिर एक दिन आपने ही उनके साथ रहेने से इनकार कर दिया.
  • उस देश के असली वारिसो की नसले बर्बाद की, 
  • उसके घर को रक्तरंजित और खेत खलियान को लहू लूहान किया, 
  • उसके सभी पवित्र स्थानों (मंदिरों) को अपवित्र किया और अंत में उसी पर तोहमत मारते हुए एक बहुत ही उपजाऊ देश का हिस्सा धर्म के नाम पर मांग लिया.
दे भी दिया गया ! उसने अपनी दोनों भुजाये काट कर धर्म की नफरत को रोकने की पूरी कोशिश करते हुए अपना गोश्त देकर आपकी यह मांग भी पूरी कर दी. जो देश बाँटने के बाद सीमा के उसपार नहीं जा सकते थे उनको इस भारत देश के वासियो ने आपको छोटा भाई और शरणार्थी मान कर सर आखों पर बैठाया और विशेष दर्जा भी दिया, अलाप्संख्यक का. हिन्दू अपनी माँ, बहिन की लुटी असिमिता को भी भूल गए, उसके वीर पुरखो, दसो गुरुओ के बलिदान को भी भूल गए. फिर भी इस देश में बचे इस असहानफरामोश कौम ने उसी के लहू से स्नान करना जारी रखा. वो जो लेलिया गया उसका तो जिक्र ही नहीं जो अभी है उसपर फिर से वोही धोंसपट्टी, मेरा लाल गोपाल अभी भी मस्जिदों में कैद है, राम लल्ला अभी भी पुलिस के सायें में है. बाबा विश्वनाथ अभी भी बंधक है. हर शहर और गाँव में अभी भी वो ही दुरभिसंधि जो आज से ६० साल पहेले थी. अभी भी उसकी गौ  माता का कलेजा चीर कर गोश्त को खाया और लहू को पीया जा रहा है. अभी भी हिन्दू लडकियों के साथ बलात्कार कर लव जिहाद किया जा रहा है. बाबा अमरनाथ पर जाना आज भी उतना ही कठिन जितना ६० साल पहेले जैसे औरंगजेब को जजिया दिया जाता है अब कश्मीर सकरार को. देश के हिन्दू को आज भी उतना अधिकार नहीं की वो अपनी माँ सरस्वती और दुर्गा के नंगे चित्रों पर विरोध दर्ज ही करा सके. आज भी गाजी और पीर पर ही अगरबत्ती जल रही है. आज भी मस्जिदों को ही संगरक्षण मिल रहा है.
आज आप धर्मनिरपेक्ष, मुसलमान और भारत सरकार हिन्दुओ के साथ न्याय करना चाहेंगी की नहीं? पकिस्तान और बंगलादेश से १९४७ में जो हिन्दू आया था वो अमूमन सक्षम था जिसका बंगलादेश और पकिस्तान के बड़े बड़े नगरो में बहुत ही अच्छा और बड़ा कारोबार था. जिसका नहीं था उसका तो वहीँ पर खतना कर दिया गया. और जो हिंदुस्तान आया उसने यहाँ आकर अपने दम पर हिंदुस्तान में अपना स्थान बनाया. परन्तु आपको फिर से इस देश ने बटवारा करने के इनाम के तौर पर अलाप्संख्यक का विशेष दर्जा दिया जो कालांतर में आपको सभी संसाधनों पर प्रथम स्थान पाने का हकदार बना गया. आज आपको हिन्दुस्तान में इतनी इज्जत और रुतबे के साथ रखा जा रहा है की पकिस्तान के मुसलमान के जीभ में पानी भर आता है और वो वहा से अपनी नौटंकी यहाँ आकर फिल्मो में, टीवी में और संगीत में पैसा कमा कमा कर जाते है. 
  • और आपने हिंदुस्तान के अपने शरण दाताओं को बदले में क्या दिया? 

  •  ८०० साल तुमने उनकी असिमिता और भावनाओ से खेला, आज दो देश लेने के बाद भी बदले में उनको वापस क्या किया ?
इसको असाहन फरामोशी नहीं कहेंगे तो क्या कहंगे आप ? 

एक कुत्ता भी रोटी पाने पर अपने मालिक की वफादारी करती है. एक भैंस भी घास डालने पर दूध देती है. परन्तु एक यह कौम है जो दो दो देश लेने के बाद भी हमारे ही अन्न खाकर हमारे ही टुकडो पर पल कर हम ही से आजादी मांगती है. बड़ा ही क्षोभ होता है. सेना के जवानो को कश्मीर में पिटते मरते क्या एक भारतीय का खून न खौले? अरे तम्बुओ में रहे रहाए अपने घरो से हजारो किलोमीटर दूर अपने ही भूभाग पर 

"क्या चाहिए आजादी"

जैसे नारे सुनने पर क्या बीतती है एक हिन्दू मन पर! अरे मुसलमान होने के नाते तो ले ही चुके-
किताबे ले चुके, उनको जला चुके, मंदिर ले चुके, तबहा कर चुके, जमीं ले चुके, इज्जत ले चुके, आबरू ले चुके , मोहोल्ले ले लिए, माताए और बहिने छीन ली, रक्त पी चुके, दसो गुरु ले लिये, मुहं से निवाले ले लिये, अधिकार ले लिये, सत्ता ले ली और अब क्या ? 

परन्तु इतना लेने के बाद हमे क्या दिया तुमने ? 

१९४७ में निश्चय यह ही हो जाता की तुम सब को अफगानिस्तान में ही ठोक देते तो समझ भी कुछ आता. इस देश ने इतना कुछ दिया पर फिर भी मांग ही रहे हो. और आज आरक्षण भी मांग रहे हो. फिर से वोहीं नौटंकी जो बंटवारे से पहेले थी, मुस्लिम विश्विद्यालयो को अलप्संख्यक का दर्जा. भिखारी बनकर मांगते हो मिल जाने पर देश की इन्ही वासियो को काटते हो. क्या यह ही दस्तूर है दुनिया का ? और में बड़े दावे के साथ कहता हूँ की हम १०० करोड़ अपने शरीर पर आग लगा कर भस्म भी हो जाये तो तुम्हारा पेट नहीं भरेगा. परन्तु एक बात जो समझ नहीं आती की आपकी आत्मा नहीं कचोटती आपको की इस दाता हिन्दू कौम को भी कुछ वापस कर दे
  • क्या इस कौम की माँ भी अपने बच्चे को यह शिक्षा नहीं देती की जिस थाली में खा रहे हो उसमे नहीं थूकते.
  • क्या एक भी बाप ऐसा नहीं जा बचपन में अपने बच्चो को यह शिक्षा देता हो की इस राम और कृष्ण की भूमि पर शांति और यज्ञ का उपवन हिंदुस्तान इन हिन्दुओ का ही है.
  • क्या एक भी बेहेन बचपन में अपने भाई से खेल खेल  में नहीं कहती की भाई इतना सुन्दर देश तो फिर किस बात पर इनको (हिन्दुओ) हमारी नस्लों ने काफ़िर कहा और दो दो  देश छीन लिए. 
  • और अभी भी इस देश का आम नागरिक समानता की बात करता है. 
  • मित्रो वक्त की विडंबना नहीं तो क्या है की हम ८० करोड़ लोग ६० साल बाद भी समान नागरिकता की ही बात करते है अपने लिए कोई विशेष दर्जे की नहीं. जो स्वाभाविक है की किसी और को विशेष दर्जा मिल रहा है उसके बराबर आने ही तो आना चाहते है तभी तो हम ८० करोड़ हिन्दू सामान नागरिकता की बात करते है और अपने इस बचे - कुछे देश में अपने लिए ६० साल बाद भी सामान अवसर की सामान नागरिकता मांग रहे है. क्या एक बाप अपने बेटे से नहीं पूछता की इस कौम का, की जब ८० करोड़ लोग चीख चीख कर सामान नागरिक सहिंता की बात कर रहे है तो कहीं न कहीं हमे विशेष दर्जा (अलप्संख्यक का) दिया जा रहा है और हम इन ही की बहेनो की इज्जत और आबरू लूट रहे है. इन ही के मंदिरों पर आज भी कब्ज़ा नहीं छोड़ते, इन ही को आज भी काफ़िर और कश्मीर में इंडियन डोग केहेंते है. 
  • क्यों देश के २० करोड़ मुस्लमान एक साथ खड़े होकर कश्मीर कूच नहीं कर सकते और इन कश्मीरी मुसलमानों को ही सबक सीखा  देते की बहुत हो चूका. हम भी इसी धरती के बेटे है. कश्मीरी मुस्लमान आजादी मांग रहे है धर्म के आधार पर, वो कोई कश्मीरी पंडित दिल्ली के टेंट से कुछ नहीं मांग रहे है, कश्मीर की सत्ता पर काबिज होकर अलग देश मांग रहे है. क्योँ उन कश्मीरियो के ऊपर लघुशंका करदेते जो हिंदुस्तान से अलग होने की मांग करता है. 
  • क्यूँ नहीं मोर्चा खोल देते भारत माता को डायान बता ने वालो पर. 
  • क्या उर्दू या अरबी में एक भी लाइन नहीं अपने देश की भक्ति पर.
  • क्या एक भी शिक्षा नहीं पूरी नसल के पास जो असहान करने वालो के प्रति किया जाता हो.
  • क्या एक भी इस कौम की माँ अपने बच्चे को रात को कहानी नहीं सुनाती जिसे सुनकर उसकी भुजाये फड़कती हो.
  • क्या एक भी माँ इनको यह नहीं बताती की इतना खाने के बाद कुछ चुकाना भी फर्ज होता है.
  • इस देश का पानी पीते हो अन्न खाते हो और उस देश के वारिसो से इतना अलगाव रखते हो. क्यूँ ?
हद होगई जिस कौम के खून का एक एक कतरा हिन्दुओ के अहसान के तले दबा हो. हज का पैसा भी हिन्दुओ से लेकर हज की जाती हो. मदरसे हिन्दू पैसे से चलते हो. उस हिन्दू को ६० साल पहेले आपकी कौम के लोग काफ़िर बता कर अपने अपने देश तोड़ कर लेगाए हों. अब जो बचे है वो भी उसके बाशिंदों को इज्जत नहीं बक्शना चाहते हो. धर्म और पूजा तो दूर की बात है जब तक एक शबरी का भी असहान था प्रभु श्री राम पर तो वो उसको भी चूका कर गये. अरे हिंदुस्तान उस देश की मिटटी है जहाँ पर प्रभु श्री कृष्ण सुदामा के चार दाने चने का भी अहसान चूका कर गये. तो उस मिटटी से उपजे अन्न का कुछ तो मान करो और बस बहुत हो चूका अब कम से कम आह्सान ही चूका दो. नहीं हम तो इतने बावले है हमारा प्रधान मंत्री तो अभी भी कह रहा है कि भारत के सभी संसाधनों पर आपका ही हक़ है. हाँ उसका क्या जा रहा है, घर से उसे थोड़े ही देना पड़ रहा है. जिनके जवान बेटे सेना में कश्मीर में मर रहे है उनसे पुछो की हक़ क्या होता है.

जब धर्म के नाम पर बंगलादेश और पाकिस्तान देदिया गया था तो बचा हुआ देश किसका है?

Wednesday, June 8, 2011

जापान और इस्लाम !!




क्या आप जानते है?

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क्या आपने कभी यह समाचार पढ़ा है कि मुस्लिम राष्ट्र का कोई प्रधानमंत्री या कोई बड़ा नेता कभी जापान या टोकियो कि यात्रा पर गया हो?

* क्या आपने कभी किसी अख़बार में यह भी पढ़ा है कि ईरान या सउदी अरब के राजा ने जापान कि यात्रा कि हो?


कारण :-

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दुनिया में जापान ही एकमात्र ऐसा देश है जो मुसलमानों को जापानी नागरिकता नहीं देता.

* जापान में अब किसी भी मुस्लमान को स्थायी रूप से रहने कि इजाजत नहीं दी जाती है.

* जापान में इस्लाम के प्रचार-प्रसार पर कड़ा प्रतिबन्ध है.

* जापान के विश्वविधालयों में अरबी या अन्य इस्लामी राष्ट्रों कि भाषाए नहीं पढाई जाती.

* जापान में अरबी भाषा में प्रकाशित कुरान आयत नहीं कि जा सकती.


इस्लाम से दुरी:-

* सरकारी आकड़ों के अनुसार, जापान में केवल दो लाख मुसलमान है. और ये भी वही है जिन्हें जापान सरकार ने नागरिकता प्रदान कि है.

* सभी मुस्लिम नागरिक जापानी भाषा बोलते है और जापानी भाषा में ही अपने सभी मजहबी व्यवहार करते है.

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जापान विश्व का ऐसा देश है जहाँ मुस्लिम देशों के दूतावास के बराबर है.

* जापानी इस्लाम के प्रति कोई रूचि नहीं रखते. आज वहा जितने भी मुसलमान है वे विदेशी कंपनियों के कर्मचारी ही है. परन्तु आज कोई बाहरी कंपनी अपनें यहाँ के मुस्लिम डाक्टर, इंजीनियर या प्रबंधक आदि को जापान में भेजती है तो जापान सरकार उन्हें जापान में प्रवेश कि अनुमति नहीं देती है.

* अधिकतर जापानी कंपनियों ने अपने नियमों में यह स्पष्ट लिख दिया है कि कोई मुसलमान उनके यहाँ नौकरी के लिए आवेदन करे.

* जापान सरकार यह मानती है कि मुसलमान कट्टरवाद के पर्याय है, इसलिए आज के वैश्विक दौर में भी वे अपने पुराने नियम बदलना नहीं चाहती.

* जापान में किराये पर किसी मुस्लिम को घर मिलेगा, इसकी तो कल्पना भी नहीं कि जा सकती. यदि किसी जापानी को उसके पडौस के मकान में मुस्लिम के किराये पर रहने कि खबर मिल जाये तो सारा मौहल्ला सतर्क हो जाता है.

* जापान  में कोई इस्लामी या अरबी मदरसा नहीं खोल सकता.


मतान्तरण पर रोक :-


* जापान  में मतान्तरण पर सख्त पाबन्दी है.

* किसी जापानी ने अपना पंथ किसी कारणवश बदल  लिया है तो उसे उसके साथ मतान्तरण कराने वाले कि सख्त सजा दी जाती है. यदि किसी  विदेशी ने यह हरकत कि है तो उसे सरकार कुछ ही घंटों में जापान छोड़ कर चले जाने का  सख्त आदेश देती है.

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यहाँ तक कि जिन ईसाई मिशनरियों का हर जगह असर है, वे जापान में दिखाई नहीं देतीं.

* वेटिकन पोप को दो बातों का बड़ा अफसोस होता है कि - एक  तो यह कि वे २० वी शताब्दी समाप्त होने के बावजूद भारत को यूनान कि तरह ईसाई देश नहीं बना सके. दूसरा यह कि जापान में ईसाईयों कि संख्या में वृद्धी नहीं हो सकी.

* जापानी चंद सिक्कों के लालच में अपने पंथ का सौदा नहीं करते. बड़ी से  बड़ी सुविधा का लालच दिया जाये तब भी वे अपने पंथ के साथ धोखा नहीं करते.

जापान में 'पर्सनल ला' जैसा कोई शगूफा नहीं है.

* यदि कोई जापानी महिला किसी मुस्लिम से विवाह कर लेती है तो उसका सामाजिक बहिस्कार कर दिया जाता है.

जापानियों को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है कि कोई उनके बारे में क्या सोचता है.

टोकियो विश्वविधालय के विदेशी अध्धयन विभाग के अध्यक्ष कोमिको यागी के अनुसारइस्लाम के प्रति जापान में हमेशा यही मान्यता रही है कि वह एक संकीर्ण सोच का मजहब  है. उसमें समन्वय कि गुंजाईश नहीं है.

* स्वतन्त्र पत्रकार मोहम्मद जुबेर ने /११ कि घटना के बाद अनेक देशों कि यात्रा कि थी. वह जापान भी गए, लेकिन वहां जाकर उन्होंने देखा कि जापानियों को इस बात पर पूरा भरोसा है कि कोई आतंकवादी जापान में पर भी नहीं मर सकता.


सन्दर्भ :-


* जापान सम्बन्धी इस चौका देने वाली जानकारी के स्रोत है शरणार्थी मामले देखने वाली संस्था 'सलिडेरीटी नेटवर्क' के महासचिव जरनल मनामी यातु

*
मुजफ्फर हुसैन द्वारा लिखित लेख के कुछ मुख्य बिंदु जो कि पांचजन्य, के ३० मई, २०१० के अंक से लिए गए है.



Have you ever read in the newspaper that a political leader or a prime minister from an Islamic nation has visited Japan?

Have you ever come across news that the King of 
Iran or a Saudi Arabia prince has visited Japan?

Japan, a Country keeping Islam at bay.

Japan has put strict restrictions on Islam and ALL Muslims.

The reasons are:
a) Japan is the only nation that does not give citizenship to Muslims.

b) In Japan permanent residency is not given to Muslims.

c) There is a strong ban on the propagation of Islam in Japan.

d) In the University of Japan, Arabic or any Islamic language is not taught.

e) One cannot import ‘Koran’ published in Arabic language.

f) According to data published by Japanese government, it has given temporary residency to only 2 lakhs
Muslims, who need to follow the Japanese Law of the Land. These Muslims should speak Japanese and carry their religious rituals in their homes.

g) Japan is the only country in the world that has a negligible number of embassies of Islamic countries.

h) Japanese people are not attracted to Islam at all.

i) Muslims residing in Japan are the employees of foreign companies.

j) Even today visas are not granted to Muslim doctors, engineers or managers sent by foreign companies.

k) In the majority of companies, it is stated in their regulations that no Muslims should apply for a job.

l) The Japanese government is of the opinion that Muslims are fundamentalist and even in the era of globalization, they are not willing to change their Muslim laws.

m) Muslims can not even think about getting a rented house in Japan.

n) If anyone comes to know that his neighbor is a Muslim then the whole neighbourhood stays alert.

o) No one can start an Islamic cell or Arabic ‘Madarsa’ in Japan

p) There is no personal (Sharia) law in Japan .

q) If a Japanese woman marries a Muslim then she is considered an outcast forever.

r) According to Mr. Komico Yagi (Head of Department, Tokyo University ) “There is a mind frame in Japan
that Islam is a very narrow minded religion and one should stay away from it.”

s) Freelance journalist Mohammed Juber toured many Islamic countries after 9/11 including Japan . He found
that the Japanese were confident that extremists could do no harm in Japan.

Well done Japan… We salute your country..